Monday, August 15, 2016

कैसे मैं यह मान लूं मेरा देश अभी आज़ाद है

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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक गीत लिखने का प्रयास किया किया हूं।
कृपया कुछ भूल चूक हो तो हमें सुझाव दें।

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आतंकी, अपराधी देशद्रोही अब आज़ाद है
निर्दोषों का निर्मम हत्यारा भी अब आज़ाद है
देश का बटवारा करने को योगी भी आज़ाद है

देश को तोड़ने वाला तो बस कायर की अौलाद है
कैसे मैं यह मान लूं मेरा देश अभी आज़ाद है।

गली गली में धर्म के नाम पे लड़ने वाले मिलते हैं।
चौक चौक पर आपस में लड़वाने वाले मिलते हैं।
फूलों की बगया में भी अब नफरत के गुल खिलते हैं।

कहीं पे आतंकी हमला है कहीं पे जातिवाद है!
कैसे मैं यह मान लूं मेरा देश अभी आज़ाद है!

चंद टकों की खातिर मां बहनों की इज्ज़त बिकती है।
मानव के करतूत देख कर मानवता भी सिसकती है।
बात बात पे देश में अब नफरत की आग भड़कती है।

निर्भयता किस चीज़ का नाम है हर सू आतंकवाद है।
कैसे मैं यह मान लूं मेरा देश अभी आज़ाद है।

गाय के नाम पे इनसानों की बली यहां पर चढ़ती है
धर्म के नाम पे देश में मानवता की होली जलती है।
राजनीति के नाम पे अब तो ग़ुंडा गरदी चलती है

शैतानों के काम करे है वह जो आदम ज़ाद है।
कैसे मैं यह मान लूं मेरा देश अभी आज़ाद है।


          ✒ ज़फ़र शेरशाह आबादी

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